विश्व प्रसिद्ध आदिवासी कचारगढ़ मेला आज 3 फरवरी को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ संपन्न

विश्व प्रसिद्ध आदिवासी कचारगढ़ मेला आज 3 फरवरी को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ संपन्न
कचारगढ़ — महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रामटेक तालुका स्थित कचारगढ़ में आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध आदिवासी कचारगढ़ मेला आज 3 फरवरी को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ संपन्न हो गया।
हर वर्ष 30 जनवरी से शुरू होकर पाँच दिनों तक चलने वाला यह मेला गोंड समुदाय की आस्था, परंपरा और संस्कृति का सबसे बड़ा समागम माना जाता है।
कचारगढ़ मेले के अंतिम दिन लाखों श्रद्धालु गोंड समुदाय के पुरखों और देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए एकत्र हुए।
यह मेला गोंड समाज के लिए आस्था का महाकुंभ माना जाता है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी समुदाय के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।
मेले के दौरान स्थानीय गुफा और बूढ़ा देव के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
श्रद्धालुओं ने कचारगढ़ की पवित्र प्राकृतिक गुफा में पारी कुपार लिंगो और बूढ़ादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की।
समापन अवसर पर आदिवासी समूहों द्वारा पारंपरिक लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
ढोल, मांदरी और लोक वाद्यों की धुनों पर युवक-युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
🔱 धार्मिक सभा और संदेश – मेले के अंतिम दिनों में आदिवासी धर्मगुरुओं और समाज के वरिष्ठ नेताओं द्वारा धर्म सभाएँ और प्रवचन आयोजित किए गए।
इन सभाओं में गोंडवाना संस्कृति, प्रकृति पूजा और समाज की एकता पर प्रकाश डाला गया।
समापन अवसर पर समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और मेले के सफल आयोजन के लिए कार्यकर्ताओं और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
कचारगढ़ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
यह मेला हर वर्ष आदिवासी समाज की पहचान और एकता को मजबूत करता है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ता है।














