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Home›छत्तीसगढ़›राज्यपाल सुश्री उइके के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र

राज्यपाल सुश्री उइके के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र

By admin
February 22, 2021
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जनजातीय समाचार नेटवर्क रिपोर्टर राज्य के प्रमुख सी.जी. डॉ। सुजीत सिंह परिहार

राज्यपाल सुश्री उइके के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र

सभी मोर्चों पर खरी उतरी मेरी सरकार, कोरोना काल में भी अनेक क्षेत्रों में हासिल की नई उपलब्धियां: सुश्री उइके
गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की कल्पना को साकार करने के लिए एकजुट होकर किये गए कार्य

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके के अभिभाषण के साथ आज छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले सत्र में आप सबका हार्दिक अभिनंदन करती हूं। मुझे खुशी है कि आप सब ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की कल्पना को साकार करने के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं। कोरोना महामारी ने विगत वर्ष अकस्मात ही पूरी दुनिया को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया था। मानवता के सामने आए इस ऐतिहासिक संकट से निपटने में आप सबने मेरी सरकार को जो सहयोग दिया, प्रदेश की जनता  को राहत दिलाने में जो जमीनी मदद की, उसके लिए मैं आप सबको साधुवाद देती हूं। कोरोना संकट के अंधेरे काल और जंजाल से बाहर निकलने की उम्मीद के साथ, नए साल की शुरुआत हुई। कोरोना-प्रभावित विकास कार्यों के साथ नए लक्ष्यों को पूरा करने की दोहरी जिम्मेदारियों के सफलतापूर्वक निर्वाह के लिए, मैं आप सबको शुभकामनाएं प्रेषित करती हूं।

राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि बीता साल अनेक चुनौतियों से भरा था, जैसे रोज कमाने-खाने वाले परिवारों का भोजन और आजीविका, कुपोषण से लड़ रहे परिवारों को निरंतर पोषण आहार प्रदाय, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित वापसी और उनका पुनर्वास, कोरोना संक्रमण से बचाव और संक्रमित लोगों का उपचार, जनता का मनोबल बनाए रखने के इंतजाम, आर्थिक गतिविधियों की स्वाभाविक गति बनाए रखना, जन-जीवन को भय के भंवर से निकालकर सतर्कतापूर्वक जीवनयापन आदि। मुझे खुशी है कि इन सभी मोर्चों पर मेरी सरकार खरी उतरी है और प्रदेश कोरोना काल में भी अनेक क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल कर सका।

67 लाख से अधिक राशन कार्डधारी परिवारों का खाद्यान्न

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने प्रदेश को इस कठिन दौर से निकालने के लिए सूझबूझ के साथ काम किया, जिससे 67 लाख से अधिक राशन कार्डधारी परिवारों को उनकी पात्रता अनुसार खाद्यान्न, शक्कर, नमक, केरोसीन, बस्तर संभाग में गुड़, कोण्डागांव जिले में फोर्टिफाइड राइस वितरण सुरक्षा उपायों के साथ संभव हो पाया। 57 लाख अंत्योदय, प्राथमिकता, अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित तथा निःशक्तजन कार्डधारियों को 8 माह तक पात्रता अनुसार चावल तथा चना भी निःशुल्क दिया गया। प्रवासी श्रमिकों तथा अन्य लोगों की सुरक्षित घर वापसी हुई। गांव-गांव में सबकी खाद्य सुरक्षा के लिए 11 हजार से अधिक पंचायतों में 2-2 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया। ऐसे अनेक प्रयासों के सकारात्मक नतीजे मिले।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की लौ कोरोना काल में भी जलती रही

सुश्री उइके ने कहा कि मेरी सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 को मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के रूप में जो अलख जगाई थी, उसकी लौ कोरोना काल में भी जलती रहे, इसके लिए 3 लाख 62 हजार से अधिक हितग्राहियों के साथ ही 51 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों के 24 लाख से अधिक हितग्राहियों को घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट पोषण सामग्री दी गई। मध्याह्न भोजन योजना के 29 लाख से अधिक हितग्राही स्कूली बच्चों को भी रेडी-टू-ईट सूखा राशन सुरक्षित रूप से घर पहुंचाकर दिया गया। इतना ही नहीं, गर्म भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों को कोरोना से बचाव के उपायों के साथ 7 सितम्बर 2020 को पुनः शुरू कर दिया गया।

मातृ शक्ति का मनोबल और स्वावलम्बन बढ़ा

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार की प्रतिबद्धता से एक वर्ष में 99 हजार बच्चों को कुपोषण से तथा 20 हजार महिलाओं को एनीमिया से मुक्ति मिली है। महिलाओं और बच्चों की बेहतर देख-रेख और विकास के लिए महतारी जतन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना, सक्षम योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, स्वावलम्बन योजना, नवा बिहान योजना, स्व-आधार गृह योजना, उज्ज्वला गृह योजना, महिला पुलिस स्वयंसेविका योजना, छत्तीसगढ़ महिला कोष योजना, महिला शक्ति केन्द्र योजना आदि को सुचारू ढंग से लागू किया गया, जिससे मातृ शक्ति का मनोबल और स्वावलम्बन बढ़ा है।

प्रदेश के 95 प्रतिशत से अधिक किसानों का धान खरीदने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने एक बार फिर किसानों से किया गया वादा निभाया है। चुनौतियों के बीच सुधार और संकल्प के साथ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई। इस वर्ष सर्वाधिक 21 लाख 52 हजार 980 किसान पंजीकृत हुए थे, जिनमें से 20 लाख 53 हजार 483 किसानों ने अपना धान बेचा। इस प्रकार नई व्यवस्था और नए संकल्प से छत्तीसगढ़ 95.40 प्रतिशत किसानों का धान खरीदने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। धान खरीदी के हर पहलू पर एक नया कीर्तिमान बना है जैसे कुल पंजीकृत रकबा, कुल धान खरीदी का रकबा, कुल उपार्जित धान की मात्रा 92 लाख मीट्रिक टन को पार करना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इन उपलब्धियों से न सिर्फ किसानों के जीवन में बल्कि पूरे प्रदेश में कृषि उत्पादन और खुशहाली का एक नया दौर शुरू हुआ है।

किसानों के हित में उठाए गए नए-नए कदम

सुश्री उइके ने कहा कि मेरी सरकार ने किसानों के हित में जो नए-नए कदम उठाए हैं, उसके कारण इस वर्ष ब्याज मुक्त कृषि ऋण के रूप में 4 हजार 755 करोड़ रुपए की राशि वितरण का नया कीर्तिमान बना है। लगभग 16 लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जा चुके हैं। प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसायटी का पुनर्गठन कर 725 नई समितियां पंजीकृत की गई हैं, जिससे अब कुल समितियों की संख्या 1 हजार 333 से बढ़कर 2 हजार 58 हो गई है। एक ओर जहां गन्ना आधारित इथेनॉल प्लांट लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर धान आधारित इथेनॉल प्लांट लगाने की मेरी सरकार की नवाचारी सोच को भी राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन और स्वीकृति मिली है। मेरी सरकार चाहती है कि प्रदेश में धान की बंपर पैदावार के बावजूद धान के दाम का मान बना रहे इसलिए धान का इस्तेमाल अन्य लाभप्रद उपक्रमों में भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली अलग-अलग फसलों का वेल्यू एडीशन हो इसके लिए प्रत्येक विकासखण्ड में फूडपार्क एवं वनोपज प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना की जा रही है।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत धान, गन्ना, मक्का सहित 14 फसलें लेने वाले किसानों को सीधी आर्थिक मदद देने का बीड़ा उठाया है। प्रथम वर्ष में तीन किस्तों में 4500 करोड़ रुपए की राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है, वहीं शेष लगभग 1200 करोड़ रुपए की अंतिम किस्त का भुगतान भी इसी वित्तीय वर्ष में कर दिया जाएगा।

लघु वनोपज खरीदने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर

राज्यपाल ने कहा कि कृषि के अलावा वन संसाधन भी प्रदेश की बड़ी आबादी के लिए आजीविका जुटाते हैं। इसलिए मेरी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 52 कर दी है। इस कठिन दौर में भी देश की कुल लघु वनोपज खरीदी का 72.5 प्रतिशत हिस्सा खरीदकर छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा। शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना लागू की गई है। तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा तथा बोनस भुगतान की निरंतरता से इस काम में लगे लाखों परिवारों को राहत मिली है।

कैम्पा मद की राशि के सदुपयोग में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना

सुश्री उइके ने कहा कि मेरी सरकार वनों के संरक्षण तथा हरियाली के विस्तार के लिए सजग है। विगत वर्ष में 2 करोड़ 23 लाख पौधों का रोपण  किया गया, जिसमें राम वनगमन पथ, नदियों के किनारे पौध रोपण जैसे नवाचार भी शामिल हैं। 16 हजार हेक्टेयर से अधिक बिगड़े बांस वनों का सुधार किया गया। कैम्पा मद की राशि के सदुपयोग में भी छत्तीसगढ़ का कार्य राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। यही वजह है कि विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ की जो कार्य योजनाएं स्वीकृत हो रही हैं, वह अपने आकार और आयाम में देश में अव्वल हैं।

पंचायत और ग्रामीण विकास की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 11 विशिष्ट पुरस्कार प्रदत्त

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने पंचायत और ग्रामीण विकास की योजनाओं को तात्कालिक जरूरतों से जोड़ते हुए अनेक नवाचार किए,  जिसके कारण भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को 11 विशिष्ट पुरस्कारों से नवाजा है। वर्ष 2019-20 में महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत स्वीकृत मानव दिवस के लेबर बजट का लक्ष्य शत्-प्रतिशत पूरा किया गया तथा वर्ष 2020-21 में भी 81 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, जो पुनः नए कीर्तिमान की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है। महात्मा गांधी नरेगा में बीते 10 माह में श्रमिकों को अब तक 2 हजार 590 करोड़ रुपए का मजदूरी भुगतान किया गया। इस साल अब तक 2 लाख 17 हजार 291 परिवारों को 100 दिनांे का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं के साथ महात्मा गांधी नरेगा के अभिसरण से आंगनवाड़ी केन्द्रों, गौठानों, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट (टंकी), चारागाह, धान उपार्जन केन्द्रों में धान संग्रहण चबूतरे का निर्माण, नरवा का विकास आदि कार्य किए जा रहे हैं।

सुश्री उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों की 20 लाख महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जो परंपरागत रोजगार को नए अवसरों में बदलकर अपना, परिवार और गांव का जीवन बदल रही हैं। विभिन्न जिलों में बीसी सखी के रूप में 3 हजार 500 महिलाएं घर पहुंच बैंक बन गई हैं, इससे ग्रामीण महिलाओं का मनोबल और रचनात्मक क्षमता भी लगातार बढ़ रही है, जो एक सुखद संकेत है।

विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं तथा कार्यक्रमों का क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं तथा कार्यक्रमों का क्रियान्वयन पूरी लगन से किया है, जिसके कारण ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन’ में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)’ के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में द्वितीय स्थान पर रहा है। 86 ग्राम पंचायतों के ‘ओ.डी.एफ. प्लस’ घोषित होने के साथ ही छत्तीसगढ़ इस मापदण्ड में भी देश में दूसरे स्थान पर है। ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2020’ में प्रदेश को स्वच्छतम राज्य का प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। 14 नगरीय निकायों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इस सफलता का श्रेय स्वच्छता दीदी, कमाण्डो जैसे अलग-अलग नामों से लोकप्रिय कार्यकर्ताओं को जाता है। मैं चाहूंगी कि स्वच्छता के लिए जागरुकता तथा उपलब्धियां लगातार बढ़ें। राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने शहरों को झुग्गी मुक्त करने हेतु गरीबों को बेहतर आवास दिलाने की दिशा में ‘मोर जमीन-मोर मकान’ एवं ‘मोर मकान-मोर चिन्हारी’ योजनाओं के तहत सार्थक काम किया है, जिसके लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को पुरस्कृत किया गया है।

उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ में दो वर्षों की प्रगति उल्लेखनीय रही है। आगामी तीन वर्षों के लिए 5 हजार 600 किलोमीटर सड़कों तथा 26 पुलों के निर्माण की स्वीकृति भी मेरी सरकार की कार्य कुशलता का परिचायक है। इसके अलावा ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना,’ ‘मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना’ जैसी पहल से भी गांवों में बेहतर अधोसंरचना का विकास किया जाएगा।

सड़कों और पुलों का नेटवर्क किया जा रहा पूरा

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने एक नई सोच के साथ ‘जवाहर सेतु योजना’ शुरू की थी ताकि सड़कों और पुलों का नेटवर्क पूरा किया जा सके। इस तरह के लगभग 200 कार्य शुरू किए गए, जिसमें से 29 पूरे हो गए। महत्वपूर्ण शासकीय भवनों व सार्वजनिक स्थलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने हेतु ‘मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना’ के तहत 2 हजार से अधिक सड़कों का कार्य किया जा रहा है। एडीबी, केन्द्रीय सड़क निधि, एल.डब्ल्यू.ई. छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम आदि अनेक माध्यमों का एक ही लक्ष्य है कि जल्दी से जल्दी प्रदेश में बेहतर सड़कों का नेटवर्क स्थापित हो।

विमानन सेवाओं के माध्यम से भी कनेक्टीविटी का विस्तार

सुश्री उइके ने कहा कि मेरी सरकार एक ओर जहां प्रदेश को देश के प्रमुख सड़क मार्गों से जोड़ने की दिशा में पुरजोर प्रयास कर रही है और नई-नई परियोजनाएं स्वीकृत करा रही है, वहीं दूसरी ओर  विमानन सेवाओं के माध्यम से भी कनेक्टीविटी के विस्तार में सफल हो रही है। बस्तर के बाद बिलासपुर से भी अंतरराज्यीय विमानन सेवा प्रारंभ होने से प्रदेश को बहुत लाभ मिलेगा।

प्रशासनिक सेवाएं जनता के अधिक नजदीक ले जाने एक जिला, दो अनुविभाग एवं 24 नए तहसीलों का गठन

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने प्रशासन की सेवाएं जनता के ज्यादा करीब ले जाने के लिए बड़ी प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन किया है, जिसके तहत एक नया जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, दो अनुभागों तखतपुर, बड़े बचेली तथा 24 नई तहसीलों का गठन किया है। संभागीय मुख्यालय की तहसीलों को मॉडल तहसील के रूप में विकसित किया जा रहा है। आम जनता को राजस्व संबंधी मामलों के सरलता से निपटारे की सुविधाएं भी दी गई हैं। 7500 वर्ग फुट तक की शासकीय जमीन के आबंटन व व्यवस्थापन, भू-स्वामी अधिकार प्रदाय, डायवर्सन मामलों का सरलीकरण, नजूल व परिवर्तित अभिलेखों का डिजिटाइजेशन, ई-नामांकन, मोबाइल एप्प, ई-कोष, डिजिटल सिग्नेचर जैसे नवाचारों से जन सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए खुशी है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मेरी सरकार ने रेशम-हाथकरघा-बुनकर आदि कार्यों, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड आदि संस्थाओं का भरपूर योगदान सुनिश्चित किया है, जिससे लाखों लोगों को परंपरागत कला- कौशल को निखारने और बाजार में लाकर अच्छे दामों में बेचने में मदद मिली है।

कोरोना काल में भी बच्चों का नाता पढ़ाई से जुड़ा रहा

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे नवाचारों पर बल दिया जिससे संकट काल में भी बच्चांे का नाता पढ़ाई से जुड़ा रहा, साथ ही उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए निरंतरता बनाए रखने में कोई कठिनाई नहीं आई। ‘पढ़ाई तुंहर दुआर’, ‘पढ़ाई तुंहर पारा’ कार्यक्रमांे के तहत ऑनलाइन कक्षा, मोहल्ला कक्षा, लाउडस्पीकर स्कूल, बूलटू के बोल आदि तरीकों से 25 लाख बच्चों को लाभ मिला जिसकी तारीफ नीति आयोग से लेकर माननीय प्रधानमंत्री जी तक ने की है। इसी दौरान सभी जिलों में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय शुरू करने का निर्णय लिया गया और प्रथम वर्ष में 52 सरकारी विद्यालयों का उन्नयन नई सुविधाओं के साथ किया गया है, जिसमें 31 हजार से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया है।

सुश्री उइके ने कहा कि ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत बारहवीं कक्षा तक निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करने के मामले में मेरी सरकार देश में अव्वल रही है, जिससे लगभग 3 लाख से अधिक बच्चों का स्कूलों में प्रवेश हुआ है। स्थानीय बोली-भाषा में पाठ्य पुस्तकों की सुविधा 35 लाख बच्चों तक पहुंची है। भारत के गौरवशाली संविधान की जानकारी बच्चों को सरल पुस्तिका के रूप में सुलभ कराई जा रही है, ताकि वे अपने संविधान की आत्मा और भावना से जुड़कर आदर्श नागरिक के रूप में विकसित हो सकें।

उच्च शिक्षा की सुविधाएं बढ़ाने विभिन्न प्रयास

राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा की सुविधाएं ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक पहुंचाने के लिए मेरी सरकार ने विभिन्न महाविद्यालयों में एक वर्ष में 4 हजार से अधिक सीटों की वृद्धि की है। बिलासपुर विश्वविद्यालय के विस्तृत क्षेत्रफल और दूरी को देखते हुए रायगढ़ में शहीद नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय की स्थापना, लगभग एक दर्जन नई उच्च शिक्षा की संस्थाओं की स्थापना से कृषि, उद्यानिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, डेयरी प्रौद्योगिकी, मछली पालन, वानिकी के क्षेत्र में युवाओं को उच्च शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। दुर्ग जिले में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना से छत्तीसगढ़ को इस क्षेत्र में शोध और अनुसंधान का बड़ा केन्द्र बनाने में मदद मिलेगी।

राज्यपाल ने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के साथ ही यहां अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट में से 2 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था विशेष रूप से कमजोर जनजातियां जैसे अबुझमाड़िया, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, बैगा, भुंजिया तथा पंडों के लिए की गई है। ‘मुख्यमंत्री पॉलीटेक्निक गुणवत्ता विकास योजना’ के तहत रोजगार परक शिक्षा का विस्तार किया जा  रहा है।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए विशेष प्रयास किए हैं, जिसके तहत कांकेर, महासमुन्द तथा कोरबा जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना होगी, जिसमें 100-100 सीटें होंगी। दुर्ग जिले में संचालित चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण का निर्णय भी लिया गया है।

सभी जिलों में ‘डेडिकेटेड कोविड अस्पताल’ विकसित

राज्यपाल ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान सभी जिलों में ‘डेडिकेटेड कोविड अस्पताल’ विकसित किए गए ताकि लोगों को अपने गृह जिलों में ही उपचार की सुविधा मिल सके। मेरी सरकार ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्टेट टेली मेडिसिन हब’ तथा दिल की गंभीर बीमारियों के लिए अत्याधुनिक केन्द्र स्थापित किया है। इसके अलावा जिला मुख्यालय से लेकर बसाहटों तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। जैसे हमर अस्पताल, हमर लैब, दीर्घायु योजना, कीमोथेरेपी सुविधा, निःशुल्क डायलिसिस सुविधा, जांच मितान, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, दाई-दीदी क्लीनिक आदि योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इस तरह मेरी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को जनता के दरवाजे तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है। ‘मलेरिया मुक्ति’ के अभियान को बस्तर में जो सफलता मिली उससे प्रेरित होकर वैसा अभियान सरगुजा में भी चलाया जा रहा है।

सुश्री उइके ने कहा कि दिव्यांगजनों के प्रति विशेष संवेदनशीलता का परिचय देते हुए मेरी सरकार ने ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2019’ लागू करने के साथ ही शासकीय सेवा में इनका आरक्षण 6 से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया है। ‘निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम’ द्वारा विशेष सब्सिडी, ‘निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना’ जैसी पहल की व्यापक सराहना हुई है। इसी तरह वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायक उपकरण प्रदाय योजना, पेंशन हितग्राहियों का डिजिटाइजेशन जैसे प्रयासों से विशेष राहत पहुंची है।

 ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ के तहत बाजार की मांग एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ को ज्यादा असरकारक बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी करते हुए बाजार की मांग और आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे 46 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। ‘रोजगार संगी मोबाइल एप्प’ के जरिए प्रशिक्षित युवाओं और नियोक्ताओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इस तरह मेरी सरकार शिक्षा से लेकर रोजगार तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए युवा मितान के रूप में कार्य कर रही है। शिक्षा के अलावा खेलकूद, ललित कलाओं तथा विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं से भी रोजगार के रास्ते खुलें इसके लिए मेरी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रशिक्षण सुविधाएं जुटाने का अभियान छेड़ा है, जिसके तहत बिलासपुर में एथलेटिक्स, हॉकी तथा तीरंदाजी का एक्सीलेंस सेंटर तथा रायपुर में टेनिस स्टेडियम तथा अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। ‘छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद’ से युवाओं की बहुआयामी प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास हेतु अनेक जनहितकारी योजनाएं संचालित की है, जिससे इन वर्गों के जीवन स्तर में उत्तरोत्तर सुधार हो रहा है। निरस्त वन अधिकार दावों की समीक्षा से एक ओर जहां व्यक्तिगत पट्टों के वितरण में तेजी आई है, वहीं सामुदायिक वन अधिकार पत्र तथा सामुदायिक वन संसाधन पत्र देने से बहुत बड़े पैमाने पर भूमि आबंटन भी संभव हुआ है। विभिन्न शैक्षणिक सुविधाओं में बढ़ोतरी के कारण ‘जेईई मेन्स’ परीक्षा में 157, ‘जेईई एडवांस’ परीक्षा में 39 तथा ‘नीट’ परीक्षा में 166 बच्चों की सफलता का नया कीर्तिमान बना है, जो अनुसूचित क्षेत्रों की नई पीढ़ी को मिल रहे नए अवसरों का प्रतीक है। नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिलों की डेल्टा रैंकिंग में बीजापुर जिला को देश में प्रथम स्थान मिला है, वहीं कोण्डागांव, नारायणपुर और सुकमा जिले अलग-अलग मापदण्डों में अग्रणी स्थान पर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के जिलों में स्थानीय लोगों की भर्ती के लिए आयु सीमा में 3 वर्ष की विशेष छूट का लाभ बस्तर और सरगुजा संभाग के अतिरिक्त अब नवगठित गौरेला-पेण्ड्रा -मरवाही जिले को भी मिलेगा।  उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने राज्य के समस्त 45 लाख 48 हजार ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से गुणवत्तायुक्त पेयजल आपूर्ति वर्ष 2023 तक सुनिश्चित करने का लक्ष्य हाथ में लिया है, जिनमें से अभी तक 5 लाख 65 हजार नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। ‘गिरौदपुरी धाम समूह पेयजल योजना,’ ‘चंदखुरी पेयजल योजना,’ ‘सुपेबेड़ा पेयजल योजना’, ‘मिनीमाता अमृत धारा जल योजना’ जैसी विशेष पहल से विशेष जरूरतों के लिए शुद्ध पेयजल प्रदाय का संकल्प पूरा किया जा रहा है। 178 नगरीय निकायों में भी जल प्रदाय योजनाओं का काम शुरू किया गया था, जिनमें से 125 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं।

सिंचाई परियोजनाओं में सुधार तथा प्रबंधन की कुशलता से वास्तविक सिंचाई क्षमता बढ़ी

राज्यपाल ने कहा कि सिंचाई सहित विभिन्न जरूरतों के लिए जल संसाधनों का विकास करने हेतु बोधघाट परियोजना सहित 15 नई योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। विद्यमान परियोजनाओं में सुधार तथा प्रबंधन की कुशलता से वास्तविक सिंचाई क्षमता बढ़ाने में मिली सफलता का लाभ भी प्रदेश की जनता को मिलने लगा है। वर्ष 2017-18 में जहां खरीफ व रबी को मिलाकर 9 लाख 68 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की गई थी, वहीं वर्ष 2020-21 में खरीफ में 12 लाख 30 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा दी गई तथा रबी की सिंचाई से वास्तविक सिंचाई का नया कीर्तिमान बनेगा।

गोधन न्याय योजना से करीब डेढ़ लाख लोगों को मिला आय का नया जरिया

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने ‘सुराजी गांव योजना’ के तहत ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ के संरक्षण और विकास की दिशा में जो कदम बढ़ाए थे, उनसे प्रदेश में ग्रामीण अधोसंरचना तथा आर्थिक, सामाजिक विकास का एक नया आंदोलन खड़ा हो गया है। सूरजपुर तथा बिलासपुर जिले में नरवा विकास के तहत जल संरक्षण और संवर्धन के लिए किए गए कार्यों को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से देश में प्रथम पुरस्कार दिया गया है।

सुश्री उइके ने कहा कि गांव-गांव में गौठानों के विकास और नवाचारी गतिविधियों का व्यापक असर जन-जीवन में हुआ है। ‘गोधन न्याय योजना’ अपने आप में एक अद्वितीय मिसाल बनी है, जिससे 1 लाख 45 हजार से अधिक लोगों को आय का नया जरिया मिला और उनमें भी 41 प्रतिशत भूमिहीन लोग हैं। नगरीय निकायों में भी ‘गोधन न्याय-सह गोबर खरीदी केन्द्रों’ का विकास किया जा रहा है। घुरवा के प्रसंस्करण से खाद निर्माण तथा आय के अन्य साधन विकसित हुए हैं, वहीं बारी से गांवों में न सिर्फ साग-सब्जी का उत्पादन बढ़ा है बल्कि ग्रामीण जनता को कुपोषण से लड़ने का हथियार भी मिला है।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने कोरोना काल में लॉकडाउन से प्रभावित बस संचालकों को विभिन्न शुल्कों में राहत दी है। प्रदेश में ‘ड्रायविंग टेªनिंग एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की जा रही है, ताकि प्रदेश में कुशल वाहन चालक उपलब्ध हों तथा सड़क दुर्घटनाओं में अंकुश लगेगा।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए सुधार
       उपलब्धियों को आम जनता को समर्पित करने की रणनीति अपनाई है, जिससे उत्पादन, पारेषण तथा वितरण के क्षेत्र में कुशल प्रबंधन से विकास भी हुआ और उसका लाभ जनता को प्रत्यक्ष रूप में मिला। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ का लाभ 38 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिला, सिंचाई पम्पों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय का लाभ साढ़े पांच लाख किसानों तथा निःशुल्क बिजली प्रदाय योजना के तहत 20 लाख गरीब परिवारों को मिला। इस्पात उद्योगों को मंदी से उबारने के लिए ऊर्जा प्रभार ने राहत का लाभ प्रदेश में उत्पादन एवं रोजगार के रूप में मिला। ‘मोर बिजली एप्प’ के माध्यम से उपभोक्ता सेवा को गति मिली। बस्तर में बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए नेटवर्क का विस्तार किया गया है, जिससे अब पूरे प्रदेश में बिजली प्रदाय में आने वाली आकस्मिक बाधा से निपटने का एक मजबूत तंत्र तैयार हो गया है।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार की नई औद्योगिक नीति में पिछड़े क्षेत्रों तथा नए अवसरों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत सरगुजा तथा बस्तर संभाग ने न्यूनतम भूमि की आवश्यकता में राहत, वनांचल उद्योग पैकेज के तहत स्थायी पूंजी निवेश में अधिक अनुदान, बी-स्पोक पॉलिसी, अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज आदि आकर्षक प्रावधान हैं, जिसके कारण दो वर्षों में 1 हजार 207 नए उद्योगों की स्थापना, लगभग 17 हजार करोड़ रुपए का पूंजी निवेश तथा 22 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

सुश्री उइके ने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, परंपरा तथा लोक आस्था के स्थलों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में ‘राम वन गमन पर्यटन परिपथ’ के तहत 75 स्थानों में अधोसंरचना विकास, देवगुड़ी विकास, सिरपुर को बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने जैसे बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। सतरेंगा, सरोधा दादर आदि स्थानों का विकास विशिष्ट पर्यटन केन्द्रों के रूप में किया जा रहा है, जिससे स्थानीय विकास तथा रोजगार के नए-नए अवसर बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए समग्रता की सोच रखी है, जिससे कोई अंचल तथा कोई व्यक्ति प्रगति के नए सफर में हमराही बनने से छूट न पाए। पिछड़े अंचलों तथा समुदायों के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि उन्हें जल्दी से जल्दी बराबरी पर लाया जा सके।

पुलिसकर्मी को आम जनता के प्रति संवेदनशील बनाने और उनके लिए अनेक कल्याणकारी निर्णय

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पुलिस बल को बहुआयामी चुनौतियों से जूझना पड़ता है, अतः मेरी सरकार ने एक ओर जहां पुलिसकर्मियों को आम जनता के प्रति संवेदनशील बनाने पर ध्यान दिया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों की आवश्यकताओं को देखते हुए अनेक कल्याणकारी निर्णय लिए। रिस्पांस भत्ता, नाश्ता तथा भोजन की दरों में वृद्धि, स्पंदन अभियान, संवेदना कार्यक्रम, अनुकम्पा नियुक्ति, शहीद जवानों के आश्रितों के लिए एक्सग्रेसिया राशि 3 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपए, शहीदों के आश्रित परिवारों को अनुग्रह अनुदान आदि योजनाओं का व्यापक असर हुआ है। प्रदेश में नक्सल गतिविधियों सहित अन्य अपराधों में कमी आई है।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार अपने देश की महान लोकतांत्रिक परंपराओं तथा गौरवशाली संविधान में अटूट आस्था रखती है। इनके सम्मान के लिए हर संभव कदम उठाने को अपना परम कर्त्तव्य मानती है। राज्य के संसाधनों का उपयोग सही दिशा में करने के लिए मेरी सरकार की प्रतिबद्धता की एक मिसाल डीएमएफ के उपयोग के लिए नई गाइडलाइन जारी करना है। जिससे मुख्य और गौण खनिज की रायल्टी से प्राप्त अंशदान का उपयोग कुपोषण मुक्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रोजगार तथा हितग्राही मूलक कार्यों में  सुनिश्चित हुआ है। इसी तरह प्रदेश के सभी संसाधनों के राज्य हित में उपयोग, अपनी संस्कृति तथा परंपराओं के प्रति गौरव के विस्तार से प्रदेश के विकास को नई गति तथा नए लक्ष्य मिले हैं। राज्यपाल ने कहा कि मैं आप सभी जनता के नुमाइदों से आग्रह करती हूं कि राज्य सरकार की विकासपरक जनहितकारी नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों, अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की जनता को शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मददगार बनंे।

 

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